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how to get life insurance

जिंदगी के साथ बढ़ती स्थिरता और खुद के अंदर पैदा हुए असुरक्षा के भाव ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता है। अचानक हुई मृत्यु के बाद परिवार की देखभर कौन करेगा, यह सवाल हर वक्त जेहन में घूमता रहता है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो प्रतिदिन आकास्मिक मौत के काल में समा रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि जिंदगी में ऐसा कुछ कर जाएं, जिससे परिवार वालों को कम से कम आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। यही वजह है कि जीवन बीमा कराने वालों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही है। इस आर्टिकल में जीवन बीमा कराने का तरीका बताया जा रहा है। टर्म एंड कंडीशन से जुड़े पहलुओं को भी साझा किया जाएगा।  

कंपनियां करती हैं बीमा

भारत में ढेर सारी बीमा कंपनियां हैं, जो जीवन बीमा करती हैं। एलआईसी के साथ दूसरी कई प्राइवेट कंपनियां भी हैं, जो प्रीमियम के बदले बढ़े हुए कवरेज के साथ पैसों का भुगतान करती हैं। जीवन बीमा में पैसों का भुगतान आमतौर पर व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिवार वालों या फिर नॉमिनी को किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में सीधे तौर पर बीमाधारकों को भी मुआवजा दिया जाता है। कोई भी व्यक्ति अगर बीमा कराना चाहता है तो उसे पहले कंपनियों के प्रीमियम और कवरेज के बारे में पता कर लेना चाहिए।

एजेंटों के जरिए करा सकते हैं

जीवन बीमा के लिए ज्यादातर कंपनियों के अपने एजेंट हैं। एजेंट घर-घर पहुंचकर बीमा करते हैं। अगर कोई एलआईसी के जरिए अपना जीवन बीमा कराना चाहता है तो उसके एजेंट से संपर्क कर बीमा करा सकता है। एजेंट द्वारा कंपनियों के नियमों से अवगत कराया जाता है। प्रीमियम की राशि और कवरेज के बारे में भी बताया जाता है। अब यह व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि उसे किस तरह की पॉलिसी पसंद है।

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कार्यालय में संपर्क करें

अगर कोई व्यक्ति एजेंटों पर भरोसा नहीं करना चाहता है तो वह सीधे कंपनी के ऑफिस में संपर्क कर सकता है। यह एरिया मैनेजर से संपर्क कर जीवन बीमा कराया जा सकता है। जीवन बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान सीधे कार्यालय में जमा होता है। ऑनलाइन पेमेंट भी कर सकते हैं। ऐसा करने से एजेंट का चक्कर खत्म हो जाएगा। बीमा धारकों को भी सीधे तौर पर कंपनी के हर नियम की जानकारी रहेगी।

10 गुना कवरेज लेना चाहिए

कंपनियां अलग-अलग प्रीमियम दर के साथ जीवन बीमा करती हैं। इसपर अलग-अलग कवरेज भी होता है। हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि व्यक्ति को अपनी सालाना कमाई का कम से कम 10 गुना कवरेज लेना चाहिए। इस रकम में परिवार के अन्य सदस्यों की आमदनी, आपकी संपत्ति आदि के हिसाब से बदलाव हो सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि जब बीमाधारक की मृत्यु होगी तो, तब तक परिवार की जरूरतें काफी बढ़ चुकी होंगी। महंगाई दर भी तेजी के साथ बढ़ रही है। इसलिए कमाई का कम से कम 10 गुना कवरेज लेने में ही फायदा है।

प्रीमियम और कवरेज के अनुपात को समझें

भारत में ज्यादातर बीमा कंपनियां लाइफ इंश्योरेंस के जरिए बड़ी कमाई कर रही हैं। उनका फोकस कवरेज से ज्यादा प्रीमियम पर रहता है। कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जो बीमाधारकों से बड़े पैमाने पर प्रीमियम वसूलती हैं, लेकिन परिवार वालों को कवरेज के रूप में थोड़े पैसे दिए जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि बीमा कराते वक्त प्रीमियम और कवरेज के अनुपात को समझ लेना चाहिए। दोनों में संतुलन होने के बाद ही जीवन बीमा कराना बेहतर होता है।